Blog 30 Aug 2026 1 min read

नक्षत्र क्या है? — 27 नक्षत्र और उनका महत्व

भारतीय ज्योतिष की असली नींव नक्षत्र हैं। राशि से बहुत पहले, हमारे यहाँ आकाश को नक्षत्रों से पहचाना जाता था — और आज भी दशा, विवाह मिलान और मुहूर्त, तीनों की गणना नक्षत्र से ही होती है।

नक्षत्र होता क्या है

आकाश के 360 अंशों को 27 बराबर हिस्सों में बाँट दीजिए — हर हिस्सा 13°20′ का होगा। यही एक नक्षत्र है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है।

चंद्रमा एक दिन में लगभग एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए जन्म तिथि के साथ समय भी चाहिए — ख़ासकर तब जब जन्म नक्षत्र-संधि के आसपास हुआ हो।

27 नक्षत्र और उनके स्वामी

नक्षत्रस्वामीनक्षत्रस्वामी
अश्विनीकेतुस्वातिराहु
भरणीशुक्रविशाखागुरु
कृत्तिकासूर्यअनुराधाशनि
रोहिणीचंद्रज्येष्ठाबुध
मृगशिरामंगलमूलकेतु
आर्द्राराहुपूर्वाषाढ़ाशुक्र
पुनर्वसुगुरुउत्तराषाढ़ासूर्य
पुष्यशनिश्रवणचंद्र
आश्लेषाबुधधनिष्ठामंगल
मघाकेतुशतभिषाराहु
पूर्वा फाल्गुनीशुक्रपूर्व भाद्रपदगुरु
उत्तरा फाल्गुनीसूर्यउत्तर भाद्रपदशनि
हस्तचंद्ररेवतीबुध
चित्रामंगल

यह क्रम याद रखने लायक़ है, क्योंकि विंशोत्तरी दशा इसी क्रम पर चलती है — केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध।

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पाद — नक्षत्र के चार चरण

हर नक्षत्र चार पाद (चरण) में बँटा है, हर पाद 3°20′ का। इन्हीं पादों से बच्चे के नाम का शुभ अक्षर निकाला जाता है — यही कारण है कि पंडित जी जन्म के बाद "नामाक्षर" बताते हैं।

पाद इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि नवमांश (D9) कुंडली की गणना पाद से ही होती है, और विवाह-विचार में नवमांश का बहुत महत्व है।

नक्षत्र किन-किन कामों में देखा जाता है

  • विंशोत्तरी दशा — पूरी दशा-गणना जन्म नक्षत्र से शुरू होती है। नक्षत्र ग़लत तो दशा की सारी तिथियाँ ग़लत।
  • विवाह मिलान — 36 में से कई गुण नक्षत्र से ही तय होते हैं — तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8)।
  • मुहूर्त — कोई शुभ काम किस दिन करें, यह उस दिन के नक्षत्र से देखा जाता है। पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ कार्य-नक्षत्र माना गया है।
  • स्वभाव — हर नक्षत्र का अपना गुण होता है, जो व्यक्तित्व में झलकता है।

गंडमूल नक्षत्र

छह नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। ये राशि-संधि पर पड़ते हैं, इसलिए परंपरा में इनमें जन्मे बच्चे के लिए 27वें दिन शांति-पूजन की बात कही जाती है।

पर यहाँ भी घबराने की ज़रूरत नहीं। गंडमूल का अर्थ है कि जीवन में शुरुआती संघर्ष अधिक हो सकता है — और ऐसे लोग प्रायः असाधारण रूप से मज़बूत भी निकलते हैं। मूल नक्षत्र में जन्मे कई बड़े लोग इसका उदाहरण हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नक्षत्र और राशि में क्या अंतर है?

राशि 30° की होती है, कुल 12। नक्षत्र 13°20′ का होता है, कुल 27। एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं। नक्षत्र अधिक सूक्ष्म है, इसलिए ज्योतिष में उसका महत्व अधिक है।

क्या नक्षत्र से नाम रखना ज़रूरी है?

यह परंपरा है, अनिवार्यता नहीं। कई परिवार नक्षत्र-अक्षर से एक नाम रखते हैं और व्यवहार के लिए दूसरा। दोनों चलता है।

जन्म समय ठीक न हो तो नक्षत्र ग़लत हो सकता है?

हाँ, ख़ासकर तब जब जन्म नक्षत्र बदलने के समय के आसपास हुआ हो। चंद्रमा हर दिन लगभग एक नक्षत्र बदलता है, इसलिए कुछ घंटों का अंतर भी नक्षत्र बदल सकता है।

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